बिनेंस ने चुपचाप अपने अनुपालन नियमों में बदलाव किया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों को उपयोगकर्ता डेटा प्राप्त करने के लिए धीमी गति से चलने वाली सरकारी संधियों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। यह बदलाव पुलिस के लिए क्रिप्टो अपराधों की जांच को और कठिन बना सकता है, क्योंकि सीधे अनुरोध अब स्वीकार नहीं किए जाते।
बिनेंस में क्या बदला?
बिनेंस ने अपनी अनुपालन प्रक्रियाओं में बदलाव किया, जिससे कानून प्रवर्तन एजेंसियों को सीधे उपयोगकर्ता डेटा का अनुरोध करने की सुविधा समाप्त हो गई। अब एजेंसियों को सरकार-से-सरकार संधियों के माध्यम से डेटा मांगना होगा, जिसमें महीनों लग सकते हैं। यह बदलाव बिना किसी सार्वजनिक घोषणा के किया गया, जिससे कई जांचकर्ता हैरान हैं।
इससे स्कैम, हैक और रैनसमवेयर जैसे अपराधों की जांच धीमी हो सकती है। जब पुलिस को तुरंत लेन-देन रिकॉर्ड या खाता विवरण की आवश्यकता होती है, तो संधि प्रक्रिया की प्रतीक्षा करने से अपराधियों को फंड ट्रांसफर करने या गायब होने का समय मिल सकता है। यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब क्रिप्टो-संबंधित अपराधों में वृद्धि हो रही है और कानून प्रवर्तन पहले से ही इनसे निपटने में संघर्ष कर रहा है।
व्यापक अनुपालन परिदृश्य
बिनेंस को पहले भी कई देशों में नियामकीय जांच का सामना करना पड़ा है। यह कदम सहयोग से पीछे हटने के रूप में देखा जा सकता है, लेकिन कंपनी ने इस बदलाव को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं किया है। कुछ पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह बदलाव बिनेंस के कुछ देशों में कानूनी जोखिम को कम कर सकता है, लेकिन इससे उन एजेंसियों को नाराज करने का जोखिम भी है जो क्रिप्टो इकोसिस्टम की निगरानी करती हैं।
आगे क्या होगा?
यह स्पष्ट नहीं है कि क्या अन्य प्रमुख एक्सचेंज भी बिनेंस के नक्शेकदम पर चलेंगे। कानून प्रवर्तन समूह संभवतः तेज संधि प्रक्रियाओं या नए द्विपक्षीय समझौतों के लिए दबाव डालेंगे। फिलहाल, जांचकर्ताओं के पास धीमा उपकरण है — और अपराधी इसका लाभ उठा सकते हैं।




