मैक्रों का अटल रुख
मैक्रों डिजिटल टैक्स योजना के प्रति प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने महीनों से इस स्थिति को गुप्त नहीं रखा है। फ्रांसीसी सरकार इसे डिजिटल अर्थव्यवस्था में निष्पक्षता के लिए महत्वपूर्ण मानती है। पेरिस में कोई भी रुख बदलने का संकेत नहीं दे रहा है। अधिकारियों का कहना है कि राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए कर आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने वाशिंगटन के दबाव के बावजूद अपने दृष्टिकोण को नरम करने से इनकार कर दिया है। राष्ट्रपति की टीम का जोर है कि यह नीति फ्रांस के दीर्घकालिक आर्थिक लक्ष्यों को पूरा करती है। वे इस बात पर जोर देते हैं कि यह धमकियों के आगे झुकने के बारे में नहीं है। प्रशासन डिजिटल कराधान को गैर-परक्राम्य मानता है। उन्होंने संभावित परिणामों के लिए तैयारी कर ली है। यह रणनीति में कोई आश्चर्यजनक बदलाव नहीं है—यह उनके पिछले बयानों के अनुरूप है। राष्ट्रपति ने सार्वजनिक और निजी रूप से इस स्थिति को दोहराया है। यहां लचीलेपन का कोई संकेत नहीं है। फ्रांसीसी रुख मजबूत बना हुआ है।
अमेरिकी धमकियां आकार ले रही हैं
ट्रम्प प्रशासन ने जवाब में फ्रांसीसी वस्तुओं पर टैरिफ की धमकी दी है। वे डिजिटल टैक्स को अमेरिकी कंपनियों के लिए अनुचित मानते हैं। अमेरिकी अधिकारियों ने इसे अमेरिकी टेक दिग्गजों के खिलाफ लक्षित कदम बताया। धमकियां आकस्मिक टिप्पणियों के माध्यम से नहीं, बल्कि आधिकारिक चैनलों से आईं। उन्होंने कार्रवाई के लिए कोई समयसीमा नहीं दी, लेकिन परिणाम स्पष्ट कर दिए। टैरिफ कुछ फ्रांसीसी आयातों को प्रभावित करेंगे, हालांकि यह निर्दिष्ट नहीं किया गया कि कौन से। प्रशासन ने हाल की वार्ताओं में अपनी भाषा को नरम नहीं किया है। व्यापार विवादों में टैरिफ धमकियों का उपयोग करने का यह पहला मौका नहीं है। यह दृष्टिकोण उनकी व्यापक व्यापार रणनीति में फिट बैठता है। वे इसे अमेरिकी आर्थिक हितों के लिए एक गंभीर चुनौती के रूप में देख रहे हैं। पेरिस के लिए संदेश सीधा है: कर हटाओ या दंड भुगतो।
गतिरोध बढ़ रहा है
दोनों पक्ष अपनी स्थिति पर अड़े हैं, और कोई बीच का रास्ता नहीं निकल रहा है। फ्रांसीसी सरकार कर योजना में संशोधन नहीं करेगी। अमेरिका अपनी टैरिफ धमकी वापस नहीं लेगा। राजनयिक चैनल सक्रिय हैं, लेकिन कोई दृश्य प्रगति नहीं हो रही है। व्यापार टीमों के बीच बैठकों ने किसी भी पक्ष की स्थिति नहीं बदली है। इसे हल करने के लिए बैकचैनल सौदों का कोई संकेत नहीं है। यह विवाद तकनीकी चर्चाओं से आगे बढ़ चुका है। अब यह नेताओं के बीच इच्छाशक्ति की परीक्षा है। फ्रांस कर को संप्रभुता का मुद्दा मानता है। अमेरिका इसे बाजार पहुंच पर हमले के रूप में देखता है। कोई भी पक्ष पहले झुकना नहीं चाहता। यह गतिरोध बिना नए विकास के महीनों तक चल सकता है। वर्तमान वार्ता समझौता नहीं कर पा रही है। हिलने-डुलने की क




