इंग्लैंड 2026 विश्व कप में लगातार नौ मैचों की जीत के साथ पहुंचेगा, यह सिलसिला टीम के हाल के वर्षों में सबसे मजबूत फॉर्म को दर्शाता है। यह लय क्वालिफाइंग अभियान की शुरुआत से लेकर अब तक खेले गए सभी मैचों में कायम है, जिसमें प्रतिस्पर्धी और मैत्रीपूर्ण मुकाबले शामिल हैं।
यह सिलसिला कैसे बना
जीतें एक के बाद एक आईं, जिनकी शुरुआत क्वालिफायर के पहले मैच में संकीर्ण जीत से हुई। टीम ने पूरे क्वालिफाइंग चरण में एक भी अंक नहीं गंवाया। हर मैच ने इस लय को बनाए रखने का दबाव बढ़ाया, और टीम ने उसे निभाया। खिलाड़ी आते-जाते रहे, लेकिन नतीजे लगातार अच्छे रहे।
यह सिलसिला सिर्फ आंकड़ों का नहीं है। यह गति का मामला है। एक टीम जो लगातार नौ मैच जीतती है, वह कड़े मुकाबलों को सुलझाना और अलग-अलग तरह के विरोधियों से निपटना सीख जाती है। यह अनुभव टूर्नामेंट के नॉकआउट दौर में अहम साबित हो सकता है।
इंग्लैंड विश्व कप में उन कुछ टीमों में शामिल है जो लंबी जीत की लय पर सवार हैं। यह लय टीम को किकऑफ से पहले एक मनोवैज्ञानिक बढ़त देती है। विरोधी एक ऐसी टीम देखेंगे जो शायद ही अपने लक्ष्य से भटकती है। लेकिन सिलसिले का अंत होता ही है। असली परीक्षा तब होगी जब पहले ग्रुप मैच की सीटी बजेगी।
टीम ने सार्वजनिक रूप से इस सिलसिले पर ज्यादा चर्चा नहीं की है। वे पिछले नौ मैचों के बजाय अगले मैच पर ध्यान दे रहे हैं। इसी रवैये ने उन्हें यह लय बनाने में मदद की।
विश्व कप का ड्रॉ तय हो चुका है, और इंग्लैंड अपने ग्रुप के विरोधियों को जानता है। टीम टूर्नामेंट की शुरुआत एक ऐसे मैच से करेगी जो इस लय को दस तक बढ़ा सकता है। कैंप में कोई भी इसे हल्के में नहीं ले रहा। ग्रुप चरण के हर विरोधी की अपनी योजनाएँ हैं। इंग्लैंड का काम यह साबित करना है कि ये नौ जीतें कोई संयोग नहीं थीं।




