ब्लैकरॉक के सीईओ लै리 फिंक ने चेतावनी दी है कि चीन द्वारा 100 गीगावॉट परमाणु और सौर ऊर्जा का तेजी से निर्माण उसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के लिए ऊर्जा आपूर्ति की दौड़ में निर्णायक बढ़त दिला रहा है। यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब अमेरिका में नई ऊर्जा परियोजनाओं पर रोक लगने से अमेरिकी प्रगति धीमी हो रही है, जिससे देश कदमताल बनाए रखने में संघर्ष कर रहा है।
AI के लिए ऊर्जा क्यों मायने रखती है
AI डेटा सेंटर भारी मात्रा में बिजली की खपत करते हैं। एक बड़े भाषा मॉडल को प्रशिक्षित करने में सैकड़ों घरों की वार्षिक खपत के बराबर बिजली लग सकती है। जो देश तेजी से स्वच्छ और विश्वसनीय बिजली उत्पादन क्षमता बना सकते हैं, वे AI निवेश और विकास को आकर्षित करने में बेहतर स्थिति में हैं। फिंक ने चीन के 100 गीगावॉट कार्यक्रम—जिसमें परमाणु रिएक्टर और सौर फार्म शामिल हैं—को इस बात का सबूत बताया कि बीजिंग वाशिंगटन से तेजी से आगे बढ़ रहा है।
अमेरिकी रोक: एक बाधा
संयुक्त राज्य अमेरिका में, राज्य और संघीय स्तर पर नए बिजली संयंत्रों, ट्रांसमिशन लाइनों और यहां तक कि सौर प्रतिष्ठानों पर लगाई गई रोक ने नई क्षमता के निर्माण को धीमा कर दिया है। पर्यावरणीय समीक्षाएं, स्थानीय विरोध और अनुमति संबंधी देरी परियोजनाओं को वर्षों तक खींच सकती हैं। जबकि अमेरिका के महत्वाकांक्षी जलवायु लक्ष्य हैं, घोषणा और संचालन के बीच का अंतर बढ़ता जा रहा है। फिंक की टिप्पणियों से संकेत मिलता है कि सुव्यवस्थित दृष्टिकोण के बिना, देश वैश्विक AI प्रतिस्पर्धा में पिछड़ने का जोखिम उठा सकता है।
फिंक का शीर्ष दृष्टिकोण
फिंक ब्लैकरॉक का नेतृत्व करते हैं, जो 10 ट्रिलियन डॉलर से अधिक की प्रबंधनाधीन संपत्तियों वाला दुनिया का सबसे बड़ा परिसंपत्ति प्रबंधक है। उनकी फर्म ने ऊर्जा बुनियादी ढांचे और AI कंपनियों दोनों में भारी निवेश किया है। यह स्थिति उन्हें यह स्पष्ट रूप से देखने का अवसर देती है कि अड़चनें कहां हैं। उन्होंने किसी विशिष्ट नीति का आह्वान नहीं किया है, लेकिन उनकी चेतावनी अमेरिकी नियामकों और विधायकों के लिए दांव की गंभीरता को रेखांकित करती है।
अब सवाल यह है कि क्या संयुक्त राज्य अमेरिका पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों का त्याग किए बिना अपनी ऊर्जा अनुमति प्रक्रिया को गति दे सकता है। इसका उत्तर यह तय करने में मदद करेगा कि AI विकास की अगली लहर में कौन सा देश हावी होगा।




